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Sunday, August 23, 2020

एंकरिंग स्क्रिप्ट (हिंदी दिवस)



मेरे प्रिय शिक्षक मित्रों व प्रिय छात्रों ,

हिन्दी दिवस निकट आ रहा है इसलिए यहाँ उदाहरणार्थ हिन्दी दिवस की एंकरिंग स्क्रिप्ट  आप सबकी सहायता के लिए प्रस्तुत है. आवश्यकतानुसार आप इसमें परिवर्तन कर सकते हैं.
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हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आप सभी का सहर्ष स्वागत है
आदरणीय निर्णायक गण, सभी शिक्षिकाएँ व यहां उपस्थित सभी विद्यर्थियों को प्रातः प्रणाम!
हमारे प्यारे प्यारे विद्यार्थी
प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदी की विभिन्न विधाओं व विभिन्न रंगों की छटा बिखेरते हुए और प्रथम चरण को पार करते हुए अंतिम चरण तक आ पहुँचे हैं . पिछले वर्षों तक हम अर्थात कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थी हास्य कविता का आनंद लेते रहे थे परंतु इस वर्ष अंग्रेजी की परफॉर्मेंस पोयम की तर्ज पर  हमने भी हिंदी में performance poem करने की सोची. और नतीजा आपके सामने है अब इस साल हम इस विधा का भी आनंद उठाएंगे.

सच मानिए इस विधा की प्रस्तुति आसान नहीं होती, क्योंकि एक दूसरे के साथ सामंजस्य बिठाना आसान नहीं होता.
फिर भी हमारे इन विद्यार्थियों ने जी तोड़ मेहनत की है.
और वैसे भी ....... विद्यालय के विद्यार्थी किसी भी मामले  में किसी से कम नहीं है वो तो चाहे तो क्या नहीं कर सकते!!!!

निर्णायक पद की कुर्सी पर शोभायमान है... प्यारी प्यारी..... मैम (महोदया) , और  हिन्दी भाषा विज्ञ हमारी प्यारी मैम (महोदया ) ...
तो एक बार जोरदार तालियों से स्वागत करते हैं हमारे  निर्णायक गणों का..

आइए अब शुरुआत करते हैं अपने कार्यक्रम का..
सबसे पहले आ रहे हैं
1...... और उनका ग्रुप जिनकी कविता का शीर्षक है - ..


बहुत बढिया.. बहुत बढ़िया..

अगली प्रतिभागी हैं --
2:.......
जिनका साथ दे रही है.... . और इनकी कविता का शीर्षक है -..... .



भई वाह... बहुत खूब..
मुझे तो गब्बर की बात याद आ गई.. जो  डर गया.. वो मर गया..

अपनी कविता - शुक्र है शिक्षक हूँ कोई और नहीं ! "प्रस्तुत करने आ रही है ---

3:.......... (छात्रों के नाम)
 तो जोरदार तालियों से स्वागत कीजिए हमारी
इस जोड़ी का..



कमाल.. कमाल.. कमाल...

अब बारी है उनकी..  इतिहास का भूत... जिनका कभी पीछा ही नहीं छोड़ते...
चलिए उनका भी दुखड़ा सुन लेते हैं और बुलाते हैं
4:.......... के ग्रुप(समूह ) को...
तालियाँ........



वाह... वाह.. वाह  मजा आ गया
सचमुच... मुझे भी यकीन हो गया है कि इतिहास  का भूत बहुतों को डराने की ताकत रखता है..

चलिए इतिहास की बात इतिहास में दफन करते हैं और बुलाते हैं अपने अगले प्रतिभागियों को...
  अरे ये क्या... हमारे अगले प्रतिभागी भी हमें इतिहास की  ही सैर कराने आ रहे हैं ...
 ..बच्चों... वीर रस से ओत प्रोत यह कविता हमारे और आपके भीतर देशभक्ति जागृत करने के लिए काफी है ...

तो चलिए सुनते हैं अगली कविता... खूब लड़ी मरदानी.... जिसे प्रस्तुत करने आ रही है...
5:....... (छात्रों के नाम)
स्वागत कीजिए इनका जोरदार तालियों से...





भई वाह.. रानी लक्ष्मी बाई.. जिसकी वीरता और साहस के अंग्रेजों को मुँह की खान पड़ी थी. ऐसी वीरांगना को हमारा शत शत नमन

बच्चों... आगे बढ़ते हैं और बुलाते हैं
अपने अगले प्रतियोगियों को जो कुछ ढूंढ रहे हैं पर उन्हें मिल नहीं रहा है
आपको उनकी मदद की आवश्यकता है
चलिए बुलाते हैं..

6:........... के ग्रुप को और जानते हैं कि आखिर वे ढूँढ क्या रहे हैं???



बहुत खूब... बहुत खूब...

सचमुच शोचनीय बात है कि आखिर ये सब कहाँ नदारद हो गए!!!

खैर.. अब बारी आती है अगले ग्रुप को बुलाने की
जो बड़े दावे के साथ कहते है..
मैं वीर हूँ.. डरपोक नहीं...
जोरदार तालियाँ हो जाए
7:...... और उसके ग्रुप के लिए...


बहुत बहुत बहुत.. अच्छी प्रस्तुति...
और आप लोग बिल्कुल भी डरपोक नहीं...
...
बच्चों... अब हम अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुके हैं इसलिए बुलाते हैं अपने अगले ग्रुप को...
...... आ रहे हैं...
अपनी कविता  -...... "" लेकर ...
जोरदार तालियों से स्वागत कीजिए हमारे आखिरी प्रतिद्वंदियों का....
तालियाँ......


बहुत अच्छा प्रदर्शन....

इसी के साथ हमारी यह प्रतियोगिता समाप्त होती है..
अब मैं आपसे रूबरू होने के लिए आमंत्रित करना चाहूंगी..... मैम को..
........ मैम ....

धन्‍यवाद!!!!





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