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| हिन्दी दिवस |
हिन्द की गौरव गाथा हिन्दी, इसकी महक रूमानी है।
शहरों की ऊँची मीनारों, गांवों की मृदु बानी है।।
मीरा के एकतारे में भी, हिंदी की स्वर लहरी है।
दोहा, छंद, गीतिका इसमें,इसमें किस्से कहानी है।।
रफी लता के गीतों में भी,हिन्दी ही इठलाती है।
यह पंत, निराला, मुन्शी जी,तुलसी , कबीर की वाणी है।।
भोजपुरी, मगही, कन्नौजी ,रूप हैं इसके और कई।
ब्रज,अवधि, बुंदेली, बघेली,खोरठा, राजस्थानी है।।
हर भाव समेटे रहती है,यह मलय पवन - सी बहती है।
इतना विस्तृत भंडार है कि,नहीं कोई इसका सानी है।।
स्मरण रहे कि स्वतंत्रता के, नारे हिंदी में गूँजे थे।
फिर सौतेली अंग्रेजी ,तुम्हें क्यों कर लगे सुहानी है!!
निज भाषा की यह दुर्गति, हमें अतिशय नहीं सुहाती है।
अंग्रेज़ी प्रभुता से लड़ ,हिन्दी की आन बचानी है।।
भूलो मत, ऐ हिन्द वासियों! ये फिरंगी कारस्तानी है।।
हिन्दी की जगमग वह ज्योति,हमें फिर से आज जलानी है।।
स्वरचित
©®सुधा सिंह
