जी जी जी जी........
राजे ऐसा सत्ताधारी, राजे ऐसा सत्ताधारी
जी जी जी जी........
धन्य हो गई धरा राष्ट्र की, गूँज उठी थी शिवऩेरी
पशु पक्षी भी लगे नाचने, पुलकित थे सब नर नारी
जन्म लिया जब छत्रपति ने बजने लगी थी रणभेरी
लाल महल में गूंज उठी थी राजे की किलकारी
चहक उठी तब भारत भूमि, छंट गई रात अँधेरी
जीजाऊ ने तब भड़काई स्वराज की चिनगारी
अस्त्र शस्त्र, शास्त्रों की ज्ञाता, थी वीरांगना नारी
ज्ञान देती थी शिवराजे को सबका बारी बारी
अग्नि स्वराज की लगी धधकने, उठा ली जिम्मेदारी
सब के दिल में राज किया, था ऐसा
सत्ताधारी
शिवराया सत्ताधारी, राजे ऐसा सत्ताधारी
जी जी जी जी........
