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Monday, July 13, 2020

एक गुड़िया माँ मुझे दिला दो


एक गुड़िया मुझे दिला दो माँ:
(स्थायी 17,16 अंतरा 16,16)



एक गुड़िया मुझे दिला दो माँ , 
मैं उसका ब्याह रचाऊँगी ।
लाल नारंगी पीत सुनहरे,  
वसनों से उसे सजाऊँगी ।।

गोरे रंगों वाली गुड़िया,
माँ आँखें नीली-नीली हों ।
सुंदर-सुंदर केशों वाली ,
लगती जो छैल छबीली हो ।।
निश दिन उसके संग खेलूँगी ,
अरु बाहर भी ले जाऊँगी ।

सीखूँगी जो विद्यालय में ,
वह आकर उसे पढाऊँगी।
कभी डॉक्टर ,इंजीनियर अरु ,
वैज्ञानिक कभी बनाऊँगी ।।
तुम जैसे माँ ममता लुटाती,
मैं उससे लाड़ लड़ाऊँगी।

भूख लगेगी जब गुड़िया को,
बर्गर व पिज्जा खिलाऊँगी ।
सखियों-सा चाहूँगी उसको,
रूठी तो उसे मनाऊँगी ।
आएगी निंदिया रानी जब,
लोरी तब उसे सुनाऊँगी।


Wednesday, January 29, 2020

बिल्ली रानी.. बाल गीत





बिल्ली ने इकदिन शीशे में,
देखी जब मतवाली चाल।
फूली नहीं समाई,
सोचा.. मैं तो चलती बड़ा कमाल।।

चाल पे मेरी दुनिया कायल,
अब चाल पे टैक्स लगाऊँगी।
ढेरों पैसे मिलेंगे मुझको ,
 मालामाल  हो जाऊँगी ।।

मेरी कैट वॉक देखने,
चीते - शेर भी आयेंगे।
ऐसा अंदाज़ दिखाऊँगी,
जिसे भूल नहीं वो पाएँगे।।
विश्व में मेरे चर्चे होंगे ,
होगा चारों ओर धमाल ।
बस थोड़ा - सा डायट कर लूँ ,
और पिचका लूँ अपने गाल।।

कुत्ते को रख लूँगी नौकर ,
मूषक ढूँढ वो लाएगा ।
उसने मेरी बात न मानी ,
तो व‍ह जूते खाएगा ।।
मालकिन की बात को टाले,
उसकी ऐसी नहीं मज़ाल ।
नहीं बचेगा मेरे हाथों ,
अगर करेगा टालम-टाल ।।

इन्हीं ख़यालों में डूबी थी ,
पीछे से कोई गुर्राया ।
सपनों में जिसे नौकर रखा ,
अरे रे..वही उसे खाने आया।।
सरपट भागी बिल्ली रानी ,
मन से निकले सभी खयाल ।
जान बच गई वही बहुत है ,
अब न चलूँ मतवाली चाल ।।



सुधा सिंह व्याघ्र












Saturday, May 4, 2019

प्रभु पंख मुझको देना..



प्रभु पंख मुझको देना
परवाज मुझको देना
मैं उड़ सकूँ गगन में
आशीष मुझको देना

चंदा के साथ खेलूँ
तारों से चाहूँ मिलना
छू लूंगा आसमान मैं
तुम साथ मेरा देना

जब जब गिरूंँ मैं तब तब
मेरा हौसला बढ़ाना.
डरकर मैं सहमूंँ जब भी
मुझको गले लगाना

भरो भक्तिभाव मन में
चरणों में स्थान देना
करूँ जब भी मैं चढ़ाई
तुम ही निसेनी बनना

प्रभु पंख मुझको देना
परवाज मुझको देना 

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